त्रियुगीनारायण मंदिर सोनप्रयाग से 12 किलोमीटर दूरी पर है और केदारनाथ से 25 किलोमीटर दूर है। छोटी ट्रैक घने वन से होकर जाने पर सोनप्रयाग से त्रियुगीनारायण मंदिर की दूरी केवल 5 किलोमीटर रह जाती है। 

त्रियुगीनारायण मंदिर कहां है

त्रियुगीनारायण मंदिर एक हिंदू मंदिर है। यह मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के त्रियुगीनारायण गांव में स्थित है। यह एक बहुत पुराना हिंदू मंदिर है, यह प्राचीन मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। इस मंदिर में विष्णु शिव और पार्वती की पूजा होती है। यह हफ्ते के सातों दिन खुला रहता है इसका खुलने का समय सुबह 7:00 बजे है और बंद होने का समय रात के 8:00 बजे तक है। 

त्रियुगीनारायण मंदिर कैसे जाएं

त्रियुगीनारायण मंदिर जाने के लिए सबसे पहले रुद्रप्रयाग तक पहुंचना होगा उसके बाद रुद्रप्रयाग से केदारनाथ धाम वाली सड़क पर जाना होगा। यहां से गुप्तकाशी होते हुए एक रास्ता सोनप्रयाग तथा एक रास्ता त्रियुगी नारायण मंदिर जाता है आप त्रियुगीनारायण वाले रास्ते पर जाएं।

सोनप्रयाग से त्रियुगीनारायण की दूरी 12 किलोमीटर (7.5 मील) है। शॉर्टकट के लिए ट्रैक का इस्तेमाल करें घोटूर केदारनाथ मार्ग पर सोनप्रयाग के माध्यम से 5 किलोमीटर (3.1 मील) की छोटी ट्रैक घने वन से होकर गुजरते हैं। 

मंदिर के दक्षिण में केदारनाथ स्थित है और केदारनाथ से त्रियुगी नारायण मंदिर की दूरी 25 (16 मील) किलोमीटर है। 

घुतपुर सोनप्रयाग से लगभग 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है यहां यहां क्षेत्र हरिद्वार गढ़वाल तथा कुमाऊं की पहाड़ियों के महत्वपूर्ण हिल स्टेशनों के साथ सड़क मार्ग से जुड़ा है। इस मंदिर के नजदीक कोई हवाई अड्डा नहीं है और सबसे नजदीकी हवाई अड्डा देहरादून में है जो नारायण मंदिर से 244 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जबकि मंदिर से निकटतम रेलवेस्टेशन 261 किलोमीटर की दूरी पर ऋषिकेश रेलवे स्टेशन है। 

त्रियुगीनारायण मंदिर

इस मंदिर में हिंदुओं के देवता विष्णु की मूर्ति भूदेवी तथा लक्ष्मी देवी के साथ विराजमान है। इस मंदिर को शिव और पार्वती के विवाह के रूप में जाना जाता है इसलिए यह एक लोकप्रिय तीर्थ स्थल है जहां लोग घूमने आते हैं।  

विष्णु ने शिव पार्वती के दिव्य विवाहमें पार्वती के भाई की भूमिका निभाई थी और ब्रह्मा विवाह यज्ञ के आचार्य बने थे। इस मंदिर के सामने एक अखंड ज्योति जलती है जो इस मंदिर की विशेषता मानी जाती है। रुद्रप्रयाग का यह मंदिर हिंदुओं के भगवान विष्णु के पांचवें अवतार भगवान वामन को समर्पित है। 

ऐसा माना जाता है कि एक लौ दिव्य विवाह के समय से जल रही है जो आज भी इस मंदिर में विद्यमान है इसलिए इस मंदिर को अखंड धुनी मंदिर भी कहा जाता है। 

जो यात्री यहां घूमने तथा शादी करने आते हैं वह इस मंदिर के हवन की राख को अपने साथ ले जाते हैं और मानते हैं कि यह राख उनके वैवाहिक जीवन को सुखी बनाएगी। त्रियुगीनारायण मंदिर के पुजारी का नाम जमलोकी है जो एक ब्राह्मण है और रविग्राम नामक गांव में रहते हैं। यह पुजारी त्रियुगीनारायण मंदिर के हवन कुंड की अग्नि (धुनी) को लगातार जलाए रख रहे हैं और यहां भगवान की पूजा, भोग, स्नान यही पुजारी करते हैं।

मंदिर के सामने ब्रह्मशिला है जिसे दिव्य विवाह का वास्तविक स्थल माना जाता है और मंदिर के सामने सरस्वती गङ्गा नामक एक धारा की शुरुआत हुई जिससे पास के सारे पवित्र सरोवर भरते हैं। नजदीक के सरोवर के नाम रूद्र कुंड,सरस्वतीकुंड, विष्णु कुंड तथा ब्रह्मा कुंड हैं। 

इन सभी सरोवरों की अपनी अलग भूमिका है और रूद्र कुंड में स्नान, ब्रह्म कुंड में अचन, सरस्वतीकुंड में तर्पण  तथा विष्णु कुंड में मार्जन किया जाता है।

त्रियुगीनारायण मंदिर में शिव पार्वती का विवाह लगभग 18415 साल पहले त्रेता युग में हुआ था। त्रेता युग आज से 17900 साल पहले खत्म हुआ था इसलिए यहा तीर्थ स्थल 17900 साल से पुराना है। मुमकिन है की पूरी दुनिया में त्रियुगीनारायण मंदिर से पुराना धर्मस्थल कोई और नहीं है। 

त्रियुगीनारायण मंदिर ऐड्रेस

यह मंदिर रुद्रप्रयाग के त्रियुगी गांव में पड़ता है इसका इसका एड्रेस है त्रियुगी विलेज उत्तराखंड 246471 तथा 07830127074 फोन नंबर है।

विशेषता 

त्रियुगीनारायण मंदिर खास तौर पर पर युवाओं के बीच काफी चर्चित है इसकी वजह यह है कि यह मंदिर शिव पार्वती विवाह के लिए प्रसिद्ध है इसलिए शादी के लिए काफी अच्छा माना जाता है। इस मंदिर में ज्यादातर प्रेमि प्रेमिका शादियां करते हैं और त्रियुगीनारायण मंदिर विवाह लागत भी काफी कम है। 

यहां शादी बिल्कुल सादे तरीके से बिना ज्यादा शोर गुल और भीड़ के पारंपरिक रीति रिवाज के अनुसार होती है। 

यह भी पढ़ें

दिल्ली से लक्षद्वीप कैसे जाएं

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *