प्राइवेट स्कूल कैसे खोलें यह एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब सबके पास नहीं होता क्योंकि भारत में स्कूल खोलना काफी जटिलताओं का सामना करना माना जाता है। हालांकि भारत में स्कूल कैसे खोलें एक ऐसा प्रश्न है जिसका जवाब काफी पेचीदा है इसलिए नहीं की स्कूल खोलना वाकय में मुश्किल है बल्कि इसलिए क्योंकि लोगों में स्कूल खोलने की जानकारी का आभाव है। और उन्हें ऐसा लगता है की स्कूल केवल बड़े लोग या जिनके पास बेहद अधिक पैसा होता है वही खोल सकते हैं। किन्तु ऐसा नहीं है और आज के इस ब्लॉग पोस्ट में हम आपको बताएंगे भारत में स्कूल खोलने के तरीके जिससे आपको यकीनन मदद मिलेगी और आप भी अपना स्कूल खोल पाएंगे।

स्कूल क्या होता है (What is school)

स्कूल क्या है – स्कूल वह स्थान है जहाँ बच्चे पढ़ने और सीखने जाते हैं ताकि अपने जीवन में कुछ बन सकें तथा अपने व्यवहार में शालीनता ला सकें। स्कूल के माध्यम से बच्चे समाज के तौर तरीके भी सीखते हैं वे दूसरों से बात करने की स्किल भी पहली बार स्कूल से ही डेवलप करते हैं। स्कूल में पढाई के अलावा बड़ों की इज़्ज़त करना और छोटों की मदद करना सिखाया जाता है, इसके आलावा पढ़ लिख कर बच्चे को सही और गलत का ज्ञान भी दिया जाता है। स्कूल जाने से बच्चों की निर्णय लेने की क्षमता में भी विकास होता है, स्कूल से ही बच्चे भारत का इतिहास तथा पूरी दुनिया का इतिहास सीख व समझ पाते हैं। स्कूल में शिक्षा को उच्च स्थान दिया जाता है और बच्चे गणित, विज्ञान तथा भूगोल के बारे में जान व समझ पाते हैं जो की काफी ज़रूरी है क्योंकि प्रैक्टिकल लाइफ में इनकी एक समय सबको आवश्यकता पढ़ती है।

प्राइवेट स्कूल कैसे खोलें

स्कूल बिज़नेस आइडियाज – दुनिया के इतिहास में पहली बार ऐसा देखा गया की स्कूल बिज़नेस को भी नुक्सान हुआ। और यह नुकसान पिछले वर्ष आई महामारी के कारण हुआ जिसकी वजह से स्कूल अब तक पूरी तरह से नहीं खुल पाए हैं। यदि इतिहास देखें तो आज तक हर बिज़नेस में उतर चढ़ाव देखा गया था पर स्कूल के बिज़नेस में ऐसा नहीं देखा गया था। स्कूल बिज़नेस को लॉन्ग रन बिज़नेस मोडल के तौर पर देखा जाता हैं जो धीमी गति से शुरू होता हैं किन्तु सालों साल चलता हैं वो भी अच्छे खासे मुनाफे के साथ। प्राइवेट स्कूल कैसे खोला जाता है इस सवाल का जवाब इस पोस्ट में दिया गया है अतः इस पोस्ट को ध्यान से पढ़ें, स्कूल खोलने से पहले आपको यह तय करना होगा की आप किस बोर्ड के लिए अपना प्राइवेट स्कूल खोलना चाहते हैं अर्थात सीबीएसई बोर्ड, राज्य बोर्ड या अन्य बोर्ड और यह तय करने के बाद ही आपका भारत में प्राइवेट स्कूल खोलने का सफर शुरू होगा।

स्कूल बिज़नेस प्लान भारत (school business plan in India)

स्कूल बिज़नेस मॉडल – स्कूल खोलना एक मुश्किल प्रक्रिया है जिसमे लीगल औपचारिकताओं को पूरा करना अनिवार्य होता है। एक प्रॉफिटेबल स्कूल खोलने के लिए सही बिज़नेस प्लान बनाना होता है और थोड़े अनुभव की भी आवश्यकता होती है क्योंकि आपको ना केवल बच्चों को संभालना होता है बल्कि उनके पेरेंट्स से भी डील करनी होती है। इसके आलावा कई और सामाजिक तथा कानूनी प्रक्रियाओं से भी गुज़ारना पड़ता है।

स्कूल बिज़नेस प्रॉफिट – जब भी आप स्कूल खोलने की सोचें तो सीधे 10 स्वी कक्षा से 12 वि कक्षा तक का ना खोलें बल्कि छोटे लेवल से शुरू करें। सबसे उचित रहेगा प्ले स्कूल या प्राइमरी स्कूल जो केवल पांचवी कक्षा तक होता है। यदि आप स्टेप बाय स्टेप स्कूल खोलते हैं यानि पहले प्ले स्कूल फिर प्राइमरी स्कूल और फिर सम्पूर्ण स्कूल तो निश्चित ही आपको स्कूल खोलने में फायदा होगा क्योंकि ऐसा करने से वक्त के साथ साथ आपके पास स्कूल चलने सम्बंधित अनुभव भी इकठ्ठा हो जाएगा जिससे सीख कर आप लम्बे समय तक एक प्रॉफिटेबल स्कूल चला सकते हैं। स्कूल चलना किसी मैनेजमेंट से कम नहीं है क्योंकि यहाँ आपको ना केवल बच्चों और उनके पैरेंट्स बल्कि सभी टीचर्स को भी मैनेज करना होता है।

भारत में स्कूल कैसे खोलें

भारत में प्राइवेट स्कूल कैसे खोलें – इंडिया में स्कूल खोलने के लिए सबसे पहले आपको बोर्ड तय करना होगा यानि अपने स्कूल में सीबीएसई बोर्ड होगा या राज्य का बोर्ड और यह तय करने के लिए आपके पास लीगल इनफार्मेशन और नॉलेज होना ज़रूरी है। बोर्ड तय करने के बाद आपको स्कूल रजिस्ट्रेशन के लिए अप्लाई करना होगा फिर एन ओ सी अप्रूवल लेना होगा तथा इसके साथ ही अन्य ज़रूरी अप्रूवल भी लेने होंगे। इन ज़रूरी अप्रूवल्स के लिए आपको मुंसिपल्टी प्राधिकरण, शिक्षाविभाग और स्वस्थविभाग से संपर्क करना होगा वे आपकी इन कार्यों को अप्रूव कराने में मदद व गाइड करेंगे।

स्कूल के लिए अप्रूवल प्रोसेस शुरू करने से पहले ही आपको स्कूल का बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना होगा क्योंकि निरीक्षक अप्रूवल के दौरान आपके स्कूल की जगह का निरिक्षण करेगा। इसके आलावा इंटीरियर और योग्य स्टाफ होना ज़रूरी है, बेहतर यह होगा की आप अप्रूवल के दौरान ही कुछ स्टाफ को सेलेक्ट कर लें और उन्हें स्कूल खुलने के बाद का ही ऑफर लेटर दें इससे आपका स्टाफ भी शो हो जाएगा। असल में भारत में स्कूल खोलना कोई मुश्किल काम नहीं है यदि आप इन सभी बेसिक रूल्स को फॉलो करते हैं तो।

स्कूल व्यवसाय – हमारी सलाह आपके लिए यह है की प्राइमरी स्कूल या प्ले स्कूल से शुरुआत करें ताकि डॉक्यूमेंटेशन में भी ज़्यादा दिक्कतों का सामना ना करना पड़े तथा शुरू में कम स्टाफ के साथ भी आप शुरुआत कर सकें। सीधे सेकंडरी स्कूल खोलने से आपको अधिक स्टाफ और अधिक औपचारिक जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है। इसके विपरीत इन्ही लीगल फॉर्मलिटीज को आप छोटे स्तर पर आसानी से कर सकते हैं फिर इनके आदि होने के बाद बड़े स्तर पर इन्हे आसानी से पूरी किया जा सकता है।

स्कूल खोलने की परमिशन कहाँ से लें

स्कूल बिज़नेस कार्ड – स्कूल खोलने के लिए सबसे पहले स्कूल का बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर ज़रूरी होता है। इसके बाद ह्यूमन रिसोर्स प्लानिंग ज़रूरी है अतः अपना स्कूल बिज़नेस मोडल ज़रूर बनाएं इस मोडल में स्कूल ज़मीन, बिल्डिंग लेआउट, स्कूल लेआउट, मैन पावर, स्टाफ की जानकारी देनी होगी। आप चाहे राज्य बोर्ड के लिए आवेदन करें चाहे सी बी एस ई बोर्ड के लिए हर बोर्ड की अपनी शर्तें होती हैं जिसमे स्कूल को खरा उतरना ज़रूरी होता है। अतः हम आपको यही सुझाव देंगे की अपना स्कूल बिज़नेस प्लान के अंतर्गत दी गई सभी चीज़ों को व्यवस्थित ढंग से दर्शाएं ताकि बोर्ड को समझने में आसानी हो और आपको अप्रूवल मिल जाए।

स्कूल बोर्ड परमिशन – स्कूल बोर्ड के विषय में पहले से ही जानकारी हांसिल कर लें और यदि आप किसी विशेष बोर्ड के लिए अप्लाई कर रहे हैं तो पहले उनकी शर्तों को ज़रूर पढ़ें और उनकी वेबसाइट पर जाकर उनके बारे में पूरी जानकारी निकालने की कोशिश करें। कुछ बिंदु ऐसे भी हो सकते हैं जो आपकी समझ में ना आएं तो ऐसे में तुक्के मरने की बजाए किसी कंसलटेंट या वकील की सहायता ज़रूर लें। बोर्ड का आपके द्वारा स्कूल को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं से संतुष्ट होना ज़रूरी है तभी आपको मान्यता मिलेगी इसलिए किसी भी छोटी कमी को पूरा करें और जो भी स्कूल व बच्चों के विकास के प्रति कार्य व आईडिया है उसे बोर्ड के सामने ज़रूर रखें।

आर्थिक आवश्यकता भी समय पर उपलब्ध होना आवश्यक है बिना फाइनेंसियल प्लानिंग के स्कूल व्यवसाय करना मतलब अप्रूवल से दूर जाना है। आर्थिक कमी होने पर आप लोन ले सकते हैं, भारत सरकार की प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना का फायदा उठा सकते हैं इसके अंतर्गत तरुण मुद्रा लोन योजना के तहत आप लोन ले सकते हैं। यदि आप लोन किसी प्राइवेट संस्था से भी लेते हैं तो लोन डाक्यूमेंट्स ज़रूर संभाल के रखे क्योंकि स्कूल अप्रूवल के लिए ये डाक्यूमेंट्स ज़रूरी होते हैं।

शिक्षा और स्वास्थ विभाग से मिले अप्रूवल से पहले ही आप अपने स्कूल बिज़नेस प्लान बना लें तथा पूरा ब्लू प्रिंट तैयार कर लें। आपको अपने स्कूल के स्ट्रक्चर का ब्लू प्रिंट भी तैयार कर लेना चाहिए ताकि प्रपोजल में कोई फेर बदल करना हो तो वे आपके ब्लू प्रिंट के हिसाब से गाइड कर सकें। यदि आप ब्लू प्रिंट ही नहीं तैयार करेंगे तो विभाग को आपकी बात समझने में और आपको विभाग के निर्देश समझने में परेशानी होगी। अब आप स्कूल एफिलिएशन के लिए भी अप्लाई कर सकते हैं।

स्कूल टीचर्स के चयन की प्रक्रिया भी आपको ट्रांसपेरेंट रखने की ज़रूरत है क्योंकि यह एक बड़ा और अहम् पहलु होता है जिससे आपके स्कूल की रेपुटेशन बनती और बिगड़ती है। अध्यापकों के चयन हेतु सरकार द्वारा कुछ मापदंड हैं जिनका पालन करना आवश्यक है तथा आप टीचर्स की योग्यता सर्टिफिकेट भी अवश्य जांच लें इससे पारदर्शिता बनती है।

स्कूल के लिए जगह कैसे चुनें

स्कूल शुरू करने के लिए सबसे पहला कदम है अच्छी जगह की तलाश करना। इसके लिए आपको निम्न पहलुओं को ध्यान में रखना होगा जैसे बच्चों की सुरक्षा, खेल कूद का मैदान, स्कूल की शांति, प्राइवेसी आदि मूलभूत सुविधाओं का विशेष ध्यान रखना होगा। स्कूल का चुनाव करते वक्त ना सिर्फ ज़मीन बल्कि आसपास का माहौल का अच्छा होना भी ज़रूरी होता है। सेकेंडरी स्कूल खोलते वक्त ध्यान दें की उस लोकेशन में पहले से ही कोई और सेकंडरी स्कूल ना हो।

सी बी एस ई स्कूल के मानक

यदि आप सी बी एस ई स्कूल खोलना चाहते हैं तो उसके मानकों का आपको पालन करना होगा। शहर के भीतर सी बी एस ई स्कूल शुरू करने के लिए आपके पास कम से कम 1 एकड़ ज़मीन होनी अनिवार्य है। यदि आप स्कूल शहर से बाहर शुरू करना चाहते हैं तो ज़मीन कम से कम 1.5 एकड़ होनी अनिवार्य है। ध्यान रहे ये एक से डेढ़ एकड़ ज़मीन एक ही साथ हो टुकड़ों में ज़मीन ना हो।

यह बात तो आपको स्पष्ट हो गई की सी बी एस ई स्कूल शुरू करने के लिए आपके पास कम से कम 1 एकड़ ज़मीन होनी अनिवार्य है और इसके आलावा आपको शहर, शहर की आबादी, लोकेशन, स्कूल के आसपास का माहौल का भी ध्यान रखना है। मेट्रो में स्कूल शुरू करने के लिए 1600 स्क्वायर मीटर यानी (0.4 एकड़) से ज़्यादा जगह होनी चाहिए यह सी बी एस ई के नए नियम हैं।

प्ले स्कूल कैसे शुरू करें (How to start play school)

प्ले स्कूल खोलने के नियम – “दी एक्ट टू एजुकेशन” भारतीय संविधान के अंतर्गत आर्टिकल 21 ए में आता है। इस एक्ट के अनुसार 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए शिक्षा मुफ्त एवम अनिवार्य है। ऐसे में प्ले स्कूल खोलने के लिए नियम और भी कड़े हो जाते हैं।

सर्वप्रथम आपको प्ले स्कूल का प्रकार निर्धारित करना होगा अर्थात डे केयर, फुल टाइम या कुछ घंटों के लिए। आपको प्ले स्कूल का एक बजट तैयार करना होगा जो की इंफ्रास्ट्रक्चर, विज्ञापन, उपकरण, शिक्षक तथा अन्य स्टाफ, फर्नीचर आदि को देखते हुए आपको तय करना होगा। महिलाएं यदि प्ले स्कूल खोलती हैं तो वे कुछ सरकारी योजनाओं का लाभ भी ले सकती हैं जैसे पंजाब नेशनल बैंक से वे बी एम् बी परवरिश लोन ले सकती हैं जो की 12 % ब्याज दर पे मिलता है और आप वह 5 साल में चुका सकती हैं।

शिक्षक नियम – आपको नेशनल काउन्सिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) गाइडलाइन का पालन करना होगा और अपने टीचिंग स्टाफ को इसी गाइडलाइन के अनुसार नियुक्त करना होगा। शिक्षक पद के लिए अप्लाई करने वाले व्यक्ति के पास बीएड की डिग्री या एक साल का डिप्लोमा सर्टिफिकेट या इसके सामान कोई टीचिंग सर्टिफिकेट होना चाहिए। आपको शिक्षक पदों के लिए आवेदक व्यक्तियों द्वारा जमा किये गए सर्टिफिकेट आर्गेनाइजेशन की जांच करनी चाहिए।

प्राइमरी स्कूल खोलने की गाईडलाइन (Primary school guidelines)

प्राइमरी स्कूल खोलने के नियम – यदि आप प्राइमरी स्कूल खोल रहे हैं तो सबसे पहले आपके स्कूल के लिए एक ट्रस्ट या संस्था का होना अनिवार्य है जिसके निम्नतम 3 सदस्य हों। इसके लिए आपको इंडिया ट्रस्ट एक्ट या सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट में अपना रजिस्ट्रेशन करवाना चाहिए। इस सोसाइटी का नॉन प्रॉफिट आर्गेनाइजेशन होना आवश्यक है अर्थात स्कूल से मिले प्रॉफिट का शिक्षा के लिए इस्तेमाल होना अनिवार्य है। किसी भी सदस्य को कोई भी निजी प्रॉफिट नहीं होना चाहिए अतः केवल उन सदस्यों को शामिल किया जाना चाहिए जिनके पास शिक्षा सम्बन्धी अनुभव हो। ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन करवाने के बाद आपको एक बिज़नेस प्लान की आवश्यकता होगी और इस प्लान के तहत आपको इंफ्रास्ट्रक्चर डिटेल, कैपिटल इन्वेस्टमेंट, बजट प्लान, एडमिनिस्ट्रेशन प्लान, स्टाफ नियुक्ति आदि की आवश्यकता होगी।

स्कूल शुरू करने के लिए स्कूल की ज़मीन के डॉक्यूमेंट होने अनिवार्य हैं। यदि आप एक मुश्त बजट नहीं अरेंज कर सकते है तो प्राइमरी स्कूल शुरू करने के लिए आप ज़मीन या बिल्डिंग को लीज़ पर भी ले सकते हैं। अपनी ज़मीन होना सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है ताकि भविष्य में स्कूल बढ़ाना हो तो किसी और कानूनी प्रक्रिया से बचा जा सके।

सेकेंडरी स्कूल कैसे खोलें (How to start secondary school )

सेकेंडरी स्कूल रूल्स एंड रेगुलेशंस – यदि आपके पास पहले से ही सेकंडरी स्कूल है तो ऐसे में सेकेंडरी स्कूल को शुरू करना काफी आसान हो जाता है। आप सेकंडरी स्कूल की परमिशन अपने प्राइमरी स्कूल के अनुभव और उसी स्कूल में सेकेंडरी स्कूल के इंफ्रास्ट्रक्चर के ज़रिये कर सकते हैं आपको इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार या शुरू करवाना ज़रूरी है क्योंकि निरीक्षक उसका निरिक्षण करेंगे। इसके बाद आप धीरे धीरे एक से दो क्लास बढ़ा कर अपना सेकंडरी स्कूल तैयार कर सकते हैं। ऐसा करना सेकंडरी स्कूल खोलने का सबसे बढ़िया तरीका माना जाता है क्योंकि इससे आप पर आर्थिक बोझ भी नहीं पढता और सब कुछ व्यवस्थित ढंग से होता चला जाता है तथा प्राइमरी स्कूल के बेस पर सेकेंडरी स्कूल खोलने की परमिशन भी आसानी से मिल जाती है। ठीक प्राइमरी स्कूल की तरह ही सेकंडरी स्कूल के लिए भी आपको लोकल म्युन्सिपल प्राधिकरण, शिक्षा विभाग और स्वास्थ विभाग से संपर्क करना होगा।

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